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Sunday, April 22, 2018

पता नहीं वो कौन था

Image may contain: plant, flower and nature

पता नहीं वो कौन था
जो मेरे हाथ
मोगरे की डाल पँख मोर का थमा के चल दिया

पता नहीं वो कौन था
हवा के झोंके की तरह जो आया और गुज़र गया
नज़र को रंग दिल को निकहतों के दुख से भर गया

मैं कौन हूँ
गुज़रने वाला कौन था
ये फूल पँख क्या हैं क्यूँ मिले
ये सोचते ही सोचते तमाम रंग एक रंग में उतरते गए
......स्याह रंग
तमाम निकहतें इधर उधर बिखर गईं
.........ख़लाओं में

यक़ीन है..... नहीं नहीं गुमान है
वो कोई मेरा दुश्मन-ए-क़दीम था
दिखा के जो सराब मेरी प्यास और बढ़ा गया
मैं बे-हिसाब आरज़ूओं का शिकार
इंतिहा-ए-शौक़ में फ़रेब उस का खा गया

गुमान.... नहीं नहीं यक़ीन है
वो कोई मेरा दोस्त था
जो दो घड़ी के वास्ते ही क्यूँ न हो
नज़र को रंग दिल को निकहतों से भर गया
पता नहीं किधर गया

मैं इस को ढूँढता हुआ
तमाम काएनात में
उधर उधर बिखर गया

*निकहत=ख़ुशबू; ख़ला=शून्य; क़दीम=पुराना; सराब=मृग-तृष्णा

~ बशर नवाज़


  Apr 22, 2018 | e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

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