Disable Copy Text

Showing posts with label ख़्वाजा मीर दर्द. Show all posts
Showing posts with label ख़्वाजा मीर दर्द. Show all posts

Friday, June 12, 2015

तोहमतें चन्द अपने ज़िम्मे

तोहमतें चन्द अपने ज़िम्मे धर चले
जिस लिए आये थे सो हम कर चले

दोस्तों देखा तमाशा याँ का बस
तुम रहो अब हम तो अपने घर चले

~ ख़्वाजा मीर दर्द

   Jun 12, 2015| e-kavya.blogspot.com
   Submitted by: Ashok Singh 

Sunday, April 5, 2015

तुम आज हँसते हो हंस लो




तुम आज हँसते हो हंस लो मुझ पर ये आज़माइश ना बार-बार होगी
मैं जानता हूं मुझे ख़बर है कि कल फ़ज़ा ख़ुशगवार होगी|

रहे मुहब्बत में ज़िन्दगी भर रहेगी ये कशमकश बराबर,
ना तुमको क़ुरबत में जीत होगी ना मुझको फुर्कत में हार होगी|

हज़ार उल्फ़त सताए लेकिन मेरे इरादों से है ये मुमकिन,
अगर शराफ़त को तुमने छेड़ा तो ज़िन्दगी तुम पे वार होगी|

~ ख़्वाजा मीर दर्द (1721 - 1785)


   Apr 22, 2012| e-kavya.blogspot.com
   Submitted by: Ashok Singh