
फूल को प्यार करो
पर झरे तो झर जाने दो,
जीवन का रस लो
देह-मन-आत्मा की रसना से
पर जो मरे
उसे मर जाने दो।
जरा है भुजा तितीर्षा की
मत बनो बाधा-
जिजीविषु को
तर जाने दो।
आसक्ति नहीं,
आनन्द है
सम्पूर्ण व्यक्ति की
अभिव्यक्ति,
मरूँ मैं, किन्तु मुझे
घोषित यह कर जाने दो।
*जरा=वृद्धावस्था; बुढ़ापा; तितीर्षा=सांसारिकता या भवसागर से पार होने या तर जाने की कामना; जिजीविषु=जो अधिक समय तक जीना चाहता हो
~ अज्ञेय
पर झरे तो झर जाने दो,
जीवन का रस लो
देह-मन-आत्मा की रसना से
पर जो मरे
उसे मर जाने दो।
जरा है भुजा तितीर्षा की
मत बनो बाधा-
जिजीविषु को
तर जाने दो।
आसक्ति नहीं,
आनन्द है
सम्पूर्ण व्यक्ति की
अभिव्यक्ति,
मरूँ मैं, किन्तु मुझे
घोषित यह कर जाने दो।
*जरा=वृद्धावस्था; बुढ़ापा; तितीर्षा=सांसारिकता या भवसागर से पार होने या तर जाने की कामना; जिजीविषु=जो अधिक समय तक जीना चाहता हो
~ अज्ञेय
Sep 16, 2017| e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
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