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Saturday, May 16, 2015

दिल वो नगर नहीं कि

दिल वो नगर नहीं कि फिर आबाद हो सके
पछताओगे सुनो हो, ये बस्ती उजाड़कर

~ मीर तक़ी 'मीर'

  May 14, 2015| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh 

Thursday, May 7, 2015

गर दिल यही है मीर

तड़पै है जब कि सीने में उछले हैं दो-दो हाथ
गर दिल यही है मीर तो आराम हो चुका

~ 'मीर'

  May 3, 2015| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

Tuesday, April 28, 2015

क्या काम मोहब्बत से ..

होगा किसी दीवार के साये के तले 'मीर',
क्या काम मोहब्बत से उस आरामतलब को

~ मीर

  Apr 28, 2015| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

Tuesday, April 7, 2015

आए हैं मीर मुँह को बनाए

मीर तकी मीर

आए हैं मीर मुँह को बनाए जफ़ा से आज
शायद बिगड़ गयी है उस बेवफा से आज

जीने में इख्तियार नहीं वरना हमनशीं
हम चाहते हैं मौत तो अपने खुदा से आज

साक़ी टुक एक मौसम-ए-गुल की तरफ़ भी देख
टपका पड़े है रंग चमन में हवा से आज

था जी में उससे मिलिए तो क्या क्या न कहिये 'मीर'
पर कुछ कहा गया न ग़म-ए-दिल हया से आज
~ मीर तकी 'मीर'

  May 9, 2011| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

हस्ती अपनी हबाब की सी है



हस्ती अपनी हबाब की सी है ।
ये नुमाइश सराब की सी है ।।
*हबाब=बुलबुला; सराब=मृग-तृष्णा 

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए,
हर एक पंखुड़ी गुलाब की सी है ।

चश्मे-दिल खोल इस भी आलम पर,
याँ की औक़ात ख़्वाब की सी है ।

बार-बार उस के दर पे जाता हूँ,
हालत अब इज्तेराब की सी है ।
*इज़्तिराब=बेचैनी 

मैं जो बोला कहा के ये आवाज़,
उसी ख़ाना ख़राब की सी है ।
*ख़ान:ख़राब=बर्बाद 

‘मीर’ उन नीमबाज़ आँखों में,
सारी मस्ती शराब की सी है ।
*नीमबाज=अधखुली
~ मीर तकी 'मीर'

  Mar 30, 2011| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

Friday, April 3, 2015

आरज़ूएं हज़ार रखते हैं



आरज़ूएं हज़ार रखते हैं
तो भी हम दिल को मार रखते हैं

बर्क़ कम हौसला है हम भी तो
दिल एक बेक़रार रखते हैं

ग़ैर है मूराद-ए-इनायत हाए
हम भी तो तुम से प्यार रखते हैं
*इनायत=आस्था

न निगाह न पयाम न वादा
नाम को हम भी यार रखते हैं
*पयाम=संदेश

हम से ख़ुश ज़म-ज़मा कहाँ यूँ तो
लब-ओ-लहजा हज़ार रखते हैं
*ज़मज़मा=नग़मा,  राग

छोटे दिल के हैं बुताँ मशहूर
बस यही ऐतबार रखते हैं

फिर भी करते हैं "मीर" साहिब इश्क़
हैं जवाँ इख़्तियार रखते हैं
*इख़्तियार=परवाना

~ मीर तक़ी 'मीर'


  Jul 27, 2012| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

Wednesday, April 1, 2015

नाजुकी उसके लब की


हस्ती अपनी, हबाब की-सी है
यह नुमाइश, सराब की-सी है
*हबाब=बुलबुला; सराब=मृग-तृष्णा

नाज़ुकी उसके लब की, क्या कहिए
पंखड़ी इक गुलाब की-सी है

बार बार उसके दर प जाता हूँ
हालत अब इज़्तिराब की-सी है
*इज़्तिराब=बेचैनी

मैं जो बोला, कहा कि यह आवाज़
उसी ख़ान:ख़राब की-सी है
*ख़ान:ख़राब=बर्बाद

मीर, उन नीमबाज़ आँखों में
सारी मस्ती, शराब की-सी है

~ मीर

  Nov 9, 2012| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

खिलना कम कम कली ने

खिलना कम कम कली ने सीखा है
उस की आँखों की नीम-बाज़ी से

नीम-बाज़ी - आधा खुलना

~ मीर

  Nov 10, 2012| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

खुदा के कभी काइल

हम खुदा के कभी काइल ही न थे
उनको देखा तो खुदा याद आ गया

- 'मीर'

  Nov 21, 2012| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

Tuesday, March 31, 2015

पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा



पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है

चारागरी बीमारि-ए-दिल की रस्मे-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वरना दिलबर-ए-नादां भी इस दर्द का चारा जाने है
चारागरी: चिकित्सा,
रस्मे-ए-शहर-ए-हुस्न: सौन्दर्य के नगर की परम्परा

मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत, एक से वाक़िफ़ इनमें नहीं
और तो सब कुछ तंज़-ओ-कनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है
मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत: प्यार, मोहब्बत, मौज मज़े...,
तंज़-ओ-कनाया: व्यंग्य और पहेली,
रम्ज़-ओ-इशारा: रहस्य और संकेत

~ मीर तक़ी 'मीर'


  Dec 30, 2012| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh 


E-Kavya उस्ताद मेहंदी हसन को क्या कहेंगे आप ?...
http://www.youtube.com/watch?v=A373M8P6S6o
See Translation

Khan Sahib Mehdi Hassan singing the amazing...

Saturday, November 29, 2014

दिल वो नगर नहीं

दिल वो नगर नहीं कि फिर आबाद हो सके
पछताओगे सुनो हो , ये बस्ती उजाड़कर
~ 'मीर'
   April 18, 2013 | e-kavya.blogspot.com
   Submitted by: Ashok Singh

Wednesday, November 26, 2014

मुह तका ही करे है

मुह तका ही करे है जिस तिस का
हैरती है यह आइना है किस का

منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
ہیرتی ہے یہ آئنہ ہے کس کا

~ मीर

   Jun 10, 2013 | e-kavya.blogspot.com
   Submitted by: Ashok Singh

जान है तो...

’मीर’! आमादन भी कोई मरता है?
जान है तो जहान है प्यारे !

*आमादन=जान-बूझ कर

~ ’मीर’

   June 16, 2013  | e-kavya.blogspot.com
   Submitted by: Ashok Singh