
जवानी के हीले हया के बहाने
ये माना के तुम मुझ से पर्दा करोगी
ये दुनिया मगर तुझ सी भोली नहीं है
छुपा कर मुहब्बत को रुसवा करोगी
*हीले=टालमटोल करना, बहाना बनाना; हया=लाज, शर्म
बड़ी कोशिशों से बड़ी काविशों से
तमन्ना की सहमी हुई साज़िशों से
मिलेगा जो मौका तो बेचैन होकर
दरीचों से तुम मुझको देखा करोगी
*काविश=चिंता, फ़िक्र; दरीचा=खिड़की, झरोख़ा
सतायेगी जब चाँदनी की उदासी
दुखायेगी दिल जब फ़िज़ा की ख़ामोशी
उफ़क़ की तरफ़ ख़ाली नज़रें जमाकर
कभी जो न सोचा वो सोचा करोगी
*फ़िज़ा=वातावरण; उफ़क़=क्षितिज
कभी दिल की धड़कन महसूस होगी
कभी ठन्डी साँसों के तूफ़ाँ उठेंगे
कभी गिर के बिस्तर पे आहें भरोगी
कभी झुक के तकिये पे रोया करोगी
~ प्रेम वरबारतोनी
Aug 27, 2015| e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
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