
कीजे न दस में बैठ कर आपस की बातचीत
पहुँचेगी दस हज़ार जगह दस की बातचीत
कब तक रहें ख़मोश कि ज़ाहिर से आप की
हम ने बहुत सुनी कस-ओ-नाकस की बातचीत
*कस-ओ-नाकस=हर प्रकार का बड़ा छोटा आदमी
मुद्दत के बाद हज़रत-ए-नासेह करम किया
फ़र्माइये मिज़ाज-ए-मुक़द्दस की बातचीत
*हज़रत-ए-नासेह=उपदेशक महोदय; मिज़ाज-ए-मुक़द्दस=पवित्र स्वभाव
पर तर्क-ए-इश्क़ के लिये इज़हार कुछ न हो
मैं क्या करूँ नहीं ये मेरे बस की बातचीत
*तर्क-ए-इश्क़=प्यार को त्यागना
क्या याद आ गया है 'ज़फ़र' पंजा-ए-निगार
कुछ हो रही है बन्द-ओ-मुख़म्मस की बातचीत
*पंजा-ए-निगार=(महबूबा के) मेहंदी लगे हाथ; बन्द-ओ-मुख़म्मस=पांच मिसरों के बंद वाली कविता
~ बहादुर शाह ज़फ़र
Mar 08, 2015|e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
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