
एक अन्धेरा लाख सितारे, एक निराशा लाख सहारे
सबसे बड़ी सौगात है जीवन नादाँ जो जीवन से हारे
दुनिया की ये बगिया ऐसी जितने काँटे फूल भी उतने
दामन में खुद आ जायेंगे, जिनकी तरफ तू हाथ पसारे
बीते हुए कल की खातिर तू, आने वाला कल मत खोना
जाने कौन कहा से आकर, राहें तेरी फिर से सवारे
दुःख से अगर पहचान न हो तो कैसा सुख और कैसी खुशियाँ
तूफानो से लड़कर ही तो लगते हैं साहिल इतने प्यारे
~ इंदीवर
सबसे बड़ी सौगात है जीवन नादाँ जो जीवन से हारे
दुनिया की ये बगिया ऐसी जितने काँटे फूल भी उतने
दामन में खुद आ जायेंगे, जिनकी तरफ तू हाथ पसारे
बीते हुए कल की खातिर तू, आने वाला कल मत खोना
जाने कौन कहा से आकर, राहें तेरी फिर से सवारे
दुःख से अगर पहचान न हो तो कैसा सुख और कैसी खुशियाँ
तूफानो से लड़कर ही तो लगते हैं साहिल इतने प्यारे
~ इंदीवर
Feb 15, 2015|e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
No comments:
Post a Comment