आंसुओं यह बतला दो, क्यों कभी झरनों सा झरते हो
कभी हो झड़ी लगा देते, कभी बे-तरह बिखरते हो
गिर गए जब आँखों से तब किसलिए उनको भरते हो
निकल आए दिल से तब क्यों फिर जगह दिल में करते हो।
~ अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
Dec 15, 2015| e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
कभी हो झड़ी लगा देते, कभी बे-तरह बिखरते हो
गिर गए जब आँखों से तब किसलिए उनको भरते हो
निकल आए दिल से तब क्यों फिर जगह दिल में करते हो।
~ अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
Dec 15, 2015| e-kavya.blogspot.com
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