
इज़हार-ए-मोहब्बत के लिए लाज़मी नहीं
कि फूल ख़रीदे जाएँ
किसी होटल में कमरा लिया जाए
या परिंदे आज़ाद किए जाएँ
इज़हार-ए-मोहब्बत के लिए तुम अपने बोसे
काग़ज़ में लपेट कर भेज सकती हो
जिस तरह मैं ने अपने जज़्बे
तुम्हें पोस्ट कर दिए हैं
*इज़हार=बयान करना; बोसे=चुम्बन; जज़्बे=भावनाएँ
~ ज़ाहिद इमरोज़
कि फूल ख़रीदे जाएँ
किसी होटल में कमरा लिया जाए
या परिंदे आज़ाद किए जाएँ
इज़हार-ए-मोहब्बत के लिए तुम अपने बोसे
काग़ज़ में लपेट कर भेज सकती हो
जिस तरह मैं ने अपने जज़्बे
तुम्हें पोस्ट कर दिए हैं
*इज़हार=बयान करना; बोसे=चुम्बन; जज़्बे=भावनाएँ
~ ज़ाहिद इमरोज़
Oct 28, 2015| e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
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