
उनका कलम उन्हें लौटाया - धन्यवाद जी !
पत्र लिखा तो उत्तर आया - धन्यवाद जी !
छायावाद, रहस्यवाद तो बहुत सुने थे,
किंतु कहां से आ टपका यह धन्यवाद जी !
पत्नीवाद मान लेने से गदगद औरत,
पूंजीवाद पकड़ लेने से मिलती दौलत !
सत्य, अहिंसा, सदाचार को मारो गोली,
गांधीवादी को मिल जाती इनसे मोहलत।
मार्क्सवाद के हो-हल्ले में,
नाम-धाम तो हो जाता है।
लेकिन कोरे धन्यवाद में,
क्या जाता है, क्या आता है ?
भेजा - नहीं रसीद पहुंच की
आया - फाइल करें कहां पर ?
धन्यवाद धोबी का कुत्ता -
घर से घाट, घाट से फिर घर।
चला यहां से, गया वहां को,
वहां न पहुंचा, गया कहां फिर ?
घूम रहा है मारा-मारा,
धन्यवाद है नेता का सिर।
नेताजी भाषण देते हैं,
लालाजी पहनाते माला,
संयोजक ने पूरा डिब्बा
मक्खन का खाली कर डाला।
लेकिन जनता बिगड़ उठी है -
इसे उतारो, उसे लाद दो।
मटरूमल जी जल्दी आओ,
खत्म करो अब धन्यवाद दो !
धन्यवाद है या कि मुसीबत ?
बला आगई, इसको टालो।
जिसका भाषण नहीं कराना,
उससे धन्यवाद दिलवा लो।
अयशपाल जी धन्यवाद का -
भाषण देने खड़े हुए हैं।
लोग उठ गए, नेता गायब,
वह माइक पर अड़े हुए हैं।
धन्यवाद है या पत्थर है ?
आए हो तो खाना होगा।
माला भले नहीं ले जाओ
धन्यवाद ले जाना होगा !
धन्यवाद ऐसी गाली है,
देकर इसे लेख लौटा दो।
धन्यवाद उल्लू का पट्ठा -
खड़ा रहेगा, भले लिटा दो।
नाक काटकर उसे उढ़ा दो
धन्यवाद वह दोशाला है।
पाकर हाथ जोड़ने पड़ते,
ठंडी कॉफी का प्याला है।
~ गोपाल प्रसाद व्यास
Dec 6, 2015| e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
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