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Monday, April 6, 2015

बर्फ के परवत पिघलते जाऍंगे ।

बर्फ के परवत पिघलते जाऍंगे ।
बात कीजे हल निकलते जाऍंगे ।

धूप के लिक्‍खे को जल्‍दी बॉंचिये ।
बारिशों में हर्फ घुलते जाऍंगे ।

अवसरों में मुश्किलें मत देखिये ।
हाथ से अवसर निकलते जाऍंगे ।

मुश्किलों में देखिये अवसर नये ।
रास्‍ते खुद आप खुलते जाऍंगे ।



सब हवा कर कान देते हैं 'विजय' ।
हम हवा पर ऑंख रखते जाऍंगे । 


~ विजय वाते


  Jan 14, 2012| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

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