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Sunday, April 19, 2015

बीत चली है रात



अब  क्या देखें राह तुम्हारी
बीत चली है रात
छोड़ो
छोड़ो ग़म की बात

थम गये आँसू
थक गईं अँखियाँ
गुज़र गई बरसात
बीत चली है रात

कब से आस
लगी दर्शन की
कोई न जाने बात
बीत चली है रात

तुम आओ तो
मन में उतरे
फूलों की बारात
बीत चली है रात

अब  क्या देखें राह तुम्हारी
बीत चली है रात

~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  Apr 19, 2015| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

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