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Thursday, April 2, 2015

काँटों की चुभन पाई फूलों



काँटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी
दिल-ए-दर्द के मौसम में रोया भी हँसा भी

आने का सबब याद न जाने की ख़बर है
वो दिल में रहा और उसे तोड़ गया भी

हर एक से मन्ज़िल का पता पूछ रहा है
गुमराह मेरे साथ हुआ रहनुमा भी

'ग़ुमनाम' कभी अपनों से जो ग़म हुये हासिल
कुछ याद रहे उन में कुछ भूल गया भी

~ सुरेन्दर मलिक “गुमनाम”


  Oct 8, 2012| e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

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