Disable Copy Text

Wednesday, November 26, 2014

फिर से हुआ निराश हिमालय



फिर से हुआ निराश हिमालय ,
फिर से हुआ उदास

गंगा फिर गीली होने लगी
मैले को फिर से ढोने लगी
वही फिर बसने लगे बसेरे
वही वही पुनर्निवास
फिर से हुआ निराश हिमालय ,
फिर से हुआ उदास
 

राई को पर्वत और पर्वत को राई
फिर से वही योजनाएं बनायी
फिर से मूक बधिर सब भाषा
तर्क हुए बकवास
फिर से हुआ निराश हिमालय ,

फिर से हुआ उदास
 

राम जा बैठे फिर वन में ,
रावण बस गए फिर से मन में
कैसे शिला बने अब सेतू
नहीं बचा विश्वास
फिर से हुआ निराश हिमालय ,

फिर से हुआ उदास

~ अमिता तिवारी 
   Jul 6, 2013

No comments:

Post a Comment