फिर से हुआ निराश हिमालय ,
फिर से हुआ उदास
गंगा फिर गीली होने लगी
मैले को फिर से ढोने लगी
वही फिर बसने लगे बसेरे
वही वही पुनर्निवास
फिर से हुआ निराश हिमालय ,
फिर से हुआ उदास
राई को पर्वत और पर्वत को राई
फिर से वही योजनाएं बनायी
फिर से मूक बधिर सब भाषा
तर्क हुए बकवास
फिर से हुआ निराश हिमालय ,
फिर से हुआ उदास
राम जा बैठे फिर वन में ,
रावण बस गए फिर से मन में
कैसे शिला बने अब सेतू
नहीं बचा विश्वास
फिर से हुआ निराश हिमालय ,
फिर से हुआ उदास
~ अमिता तिवारी
Jul 6, 2013
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