Disable Copy Text

Saturday, November 29, 2014

गो चुकी उम्र है मेरी ढ़ल

 https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhhtQaRRpNbZFmfUl9_V4hgSoWrSw5swi_lQg3JhtYnVnDGnrc394rds8FAQjlJRTVs3K3c2eghtSxrNhXw7AE65yIKVdsLJG9ufVRKkLn3Gwlq6iL5Tjqe0aMvFgQYsT9kZh69Dv129ffn/s1600/water_hand_.jpg

गो चुकी उम्र है मेरी ढ़ल
आज भी हूँ वही जो था कल

तुमने आँसू जिसे कह दिया
मन की गंगा का है, गंगा-
जल.

एक पल के लिये सौ जनम
सौ जनम का है फल एक
पल.

पी के अमृत-कलश तुम तृषित.
तृप्त मैं पान करके 

गरल.

हूँ मनुज आस्था मेरी डग
देव हो तुम किये जाओ
छल.


~ काशी नाथ, प्रयाग  

   March 15, 2013 | e-kavya.blogspot.com
   Ashok Singh

No comments:

Post a Comment