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Saturday, November 22, 2014

कैसे सुकून पाऊँ तुझे



कैसे सुकून पाऊँ तुझे देखने के बाद,
अब क्या ग़ज़ल सुनाऊं तुझे देखने के बाद।

आवाज़ दे रही है मेरी जिंदगी मुझे,
जाऊं मैं या न जाऊं तुझे देखने के बाद।

काबे का एहतराम भी मेरी नज़र में है,
सर किस तरफ़ झुकाऊँ तुझे देखने के बाद ।

तेरी निगाह-ऐ-मस्त ने मखमूर कर दिया,
क्या मैकदे को जाऊं तुझे देखने के बाद ।

नज़रों में ताब-ऐ-दीद ही बाक़ी नही रही,
किस से नज़र मिलाऊँ तुझे देखने के बाद।

~ सईद शाहीदी
 
Oct 30, 2013 | e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh

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