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Saturday, November 22, 2014
वो आँखे नीली झील सी
वो आँखे
नीली झील सी गहरी
वो सांसें
मेरे मन की प्रहरी
वो हँसना
वो इठलाना उनका
वो मेघ दिवस
वो रुत सुनहरी
पायल छनकाते
आना उनका
हाथो का सतरंगी कंगना
मेरी अटारी,
कार्तिक की दुपहरी
~ सुधीर मौर्या ‘सुधीर’
Oct. 20, 2013
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