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Wednesday, November 26, 2014

बहुधन लै अहसान सौं

बहुधन लै अहसान सौं, पारो देत सराहि।
बैद-वधू हसि भेद सौं, रही नाहि मुँह चाँहि।।

(स्वयं वैद्यराज जी नपुंसक हैं किन्तु ग्राहक को ठगने के लिए पारे की भस्म देकर उसे मर्दानगी देना चाहते हैं। वैद्य-पत्नी यह देखकर मन ही मन हँसती है।)

~ बिहारी
   July 7, 2013

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