
जीवन कटना था, कट गया
अच्छा कटा, बुरा कटा
यह तुम जानो
मैं तो यह समझता हूं
कपड़ा पुराना एक फटना था, फट गया
जीवन कटना था कट गया।
रीता है क्या कुछ
बीता है क्या कुछ
यह हिसाब तुम करो
मैं तो यह कहता हूं
परदा भरम का जो हटना था, हट गया
जीवन कटना था कट गया।
क्या होगा चुकने के बाद
बूंद—बूंद रिसने के बाद
यह चिंता तुम करो
मैं तो यह कहता हूं
करजा जो मिटटी का पटना था, पट गया
जीवन कटना था कट गया।
बंधा हूं कि खुला हूं
मैला हूं कि धुला हूं
यह बिचार तुम करो
मैं तो यह सुनता हूं
घट—घट का अंतर जो घटना था, घट गया
जीवन कटना था कट गया।
~ गोपाल दास 'नीरज'
Oct. 3, 2013
No comments:
Post a Comment