मैं न कहता था कि सुलझा लो ये ज़ुल्फे-मुंतशिर
अब तुम्हीं देखो ज़माना कितना उलझा जाये है ।
*ज़ुल्फे-मुंतशिर=बिखरे केश
~ 'सलाम' मछली शहरी
Oct. 2, 2013 | e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
अब तुम्हीं देखो ज़माना कितना उलझा जाये है ।
*ज़ुल्फे-मुंतशिर=बिखरे केश
~ 'सलाम' मछली शहरी
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