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Wednesday, November 19, 2014

न देर तक तुझे मैं ख़ुद ही रोकता


न देर तक तुझे मैं ख़ुद ही रोकता, ऐ दोस्त!
तू जिस अदा से उठा है, उसी का रोना है।

~ फ़िराक़ गोरखपुरी
  August 18, 2014

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