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Wednesday, November 19, 2014

सता-सता के हमें अश्कबार

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सता-सता के हमें अश्कबार करती है
तुम्हारी याद बहुत बेक़रार करती है।
*अश्कबार=आँसू बरसाना

वो दिन जो साथ गुज़ारे थे प्यार में हमने
तलाश उनको नज़र बार-बार करती है।

ग़िला नहीं जो नसीबों ने कर दिया है जुदा
तेरी जुदाई भी अब हमको प्यार करती है।
*ग़िला=शिकायत

किनारे बैठ के जिसके किए थे कौल-ओ-क़रार
नदी वो अब भी तेरा इंतज़ार करती है।
*कौल=वादे; क़रार=रज़ामंदी

~ वफ़ा रूमानी

   August 17, 2014

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