थकी-टूटी हुई नींदों के दरमियाँ अब भी अक्सर
बहुत चुपके से जाग जाती है, ख़्वाहिश तेरी ।
~ नामालूम
Oct. 11, 2013 | e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
बहुत चुपके से जाग जाती है, ख़्वाहिश तेरी ।
~ नामालूम
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