
शोरगुल मचाने वालों- तुम जाओ
कुछ करके दिखाने वालों- तुम आओ
लुट रहे हैं का रोना- बहुत हुआ
वो रहा चोर! कहना- बहुत हुआ
ख़बर सुनना-सुनाना बहुत हुआ
बहुत गलत हुआ, बताना- बहुत हुआ
वक्त कैसा है बताना है? तुम जाओ
वक्त बदलना है तुम्हे- तुम आओ
ज़िंदगी चार दिन की है- बहुत हुआ
जिंदा लाशों को ना देखना- बहुत हुआ
तुम्हारा दिल हुआ पत्थर- तुम जाओ
सीना जलता है तुम्हारा- तुम आओ
शोरगुल मचाने वालों- तुम जाओ
कुछ करके दिखाने वालों- तुम आओ
~ भरत तिवारी
Oct. 26, 2013
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