Disable Copy Text

Saturday, November 22, 2014

मैं मयकदे की राह से


मैं मयकदे की राह से हो कर गुज़र गया
वरना सफ़र हयात का काफ़ी तवील था !
:)

*हयात=जीवन; तवील=लंबा

~ 'अदम'
  Oct. 26, 2013 | e-kavya.blogspot.com
  Submitted by: Ashok Singh

No comments:

Post a Comment