
बदली-बदली दुनिया है ये बदले-बदले लोग हैं,
भारी - भारी बातें हैं पर हल्के हल्के लोग हैं।
पता नहीं कब दोस्त यहाँ अपना दुश्मन बन जाएगा,
गहरे - गहरे वादे हैं पर उथले - उथले लोग हैं।
बगुला भगत बने फिरते पर हंस खूब कहलाते हैं,
भीतर से काले, ऊपर से उजले - उजले लोग हैं।
डांवाडोल लिए दिल फिरते, बातें करते सधी हुयी,
जाने किस मद में हैं डूबे बहके - बहके लोग हैं।
मेरी मानो तो दुनियाँ की बातों में मत आ जाना,
भीतर तो दुर्गंध लिए, पर महके - महके लोग हैं।
~ शशि तिवारी
Feb 18, 2013| e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
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