
आपकी याद आती रही रात भर,
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
रात भर दर्द की शम्मा जलती रही,
गम की लौ थरथराती रही रात भर
बांसुरी की सुरीली सुहानी सदा,
याद बन-बन के आती रही रात भर
याद के चाँद दिल में उतरते रहे,
चाँदनी जगमगाती रही रात भर
कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा,
कोई आवाज़ आती रही रात भर
~ मख़्दूम मोहिउद्दीन
Jan 3, 2013| e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
..and the audio,
https://www.youtube.com/watch?v=oy--rFE7fag
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