
नींद के पाँव पे पत्थर बन के आते है ख्वाब
जख्म देते है उन्हें और टूटते जाते है ख्वाब
आप चाहे तो हमारी पुतलियो से पूछ लों
हमने यादो की रुई से रात भर काते है ख्वाब
नर्म चेहरे और उन पर सख्त चोटों के निशान
सोचिए इनके सिवा अब और क्या पाते है ख्वाब
बंद सीपी में छुपे अनमोल मोती की तरह
अपने अन्दर की चमक खुद ढूंढ़ कर लाते है ख्वाब
नींद में चलने का इनको रोग है लेकिन कुवर
नींद के बाहर भी अक्सर मुझसे टकराते है ख्वाब
~ कुँअर बेचैन
Dec 10, 2012 | e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
जख्म देते है उन्हें और टूटते जाते है ख्वाब
आप चाहे तो हमारी पुतलियो से पूछ लों
हमने यादो की रुई से रात भर काते है ख्वाब
नर्म चेहरे और उन पर सख्त चोटों के निशान
सोचिए इनके सिवा अब और क्या पाते है ख्वाब
बंद सीपी में छुपे अनमोल मोती की तरह
अपने अन्दर की चमक खुद ढूंढ़ कर लाते है ख्वाब
नींद में चलने का इनको रोग है लेकिन कुवर
नींद के बाहर भी अक्सर मुझसे टकराते है ख्वाब
~ कुँअर बेचैन
Dec 10, 2012 | e-kavya.blogspot.com
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