मैं ज़िंदा हूं ये मुश्तहर कीजिये
मेरे कातिलों को खबर कीजिये,
ज़मीन सख्त है आसमां दूर
बसर हो सके तो बसर कीजिये
सितम के बहुत से हैं रद्द-ए-अमल
ज़रूरी नहीं चश्म-ए-तर कीजिये वही
ज़ुल्म बार-ए-दिगर है तो फिर
वही ज़ुल्म बार-ए-दिगर कीजिये
कफ़स तोड़ना बाद की बात है,
अभी ख़्वाहिश-ए-बाल-ओ-पर कीजिये
~ साहिर 'लुधियानवी'
August 26, 2013
मेरे कातिलों को खबर कीजिये,
ज़मीन सख्त है आसमां दूर
बसर हो सके तो बसर कीजिये
सितम के बहुत से हैं रद्द-ए-अमल
ज़रूरी नहीं चश्म-ए-तर कीजिये वही
ज़ुल्म बार-ए-दिगर है तो फिर
वही ज़ुल्म बार-ए-दिगर कीजिये
कफ़स तोड़ना बाद की बात है,
अभी ख़्वाहिश-ए-बाल-ओ-पर कीजिये
~ साहिर 'लुधियानवी'
August 26, 2013
No comments:
Post a Comment