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Monday, November 24, 2014

मैं ज़िंदा हूं ये मुश्तहर कीजिये

मैं ज़िंदा हूं ये मुश्तहर कीजिये
मेरे कातिलों को खबर कीजिये,

ज़मीन सख्त है आसमां दूर
बसर हो सके तो बसर कीजिये

सितम के बहुत से हैं रद्द-ए-अमल
ज़रूरी नहीं चश्म-ए-तर कीजिये वही

ज़ुल्म बार-ए-दिगर है तो फिर
वही ज़ुल्म बार-ए-दिगर कीजिये

कफ़स तोड़ना बाद की बात है,
अभी ख़्वाहिश-ए-बाल-ओ-पर कीजिये

~ साहिर 'लुधियानवी'

   August 26, 2013

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