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Monday, November 24, 2014

शरारत भर के आँखों में

शरारत भर के आँखों में वो उसका देखना तौबा
हम नज़रों पे जमी नज़रें झुकाना भूल जाते हैं ।

~ नामालूम

   August 31, 2013 | e-kavya.blogspot.com
   Submitted by: Ashok Singh

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