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Sunday, November 23, 2014

बला से वो दुश्मन हुआ है



बला से वो दुश्मन हुआ है किसी का
वो काफिर सनम, क्या खुदा है किसी का !

किसी की तपिश में ख़ुशी है किसी की
किसी की खलिश में मजा है किसी का !

जरा डाल दो अपनी जुल्फों का साया
मुकद्दर बहुत नारसा है किसी का !

मेरी बज्म में आ के वो पूछते है
बुरा हाल हम ने सुना है किसी का !

मेरी इल्तिजा पर बिगड़ कर वो बोले
नही मानते, इसमें क्या है किसी का !

बजाहिर न जाने, या जाने, न जाने
तुझे 'दाग़' दिल जानता है किसी का !

~ दाग़ देहलवी

   Sept 7, 2013

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