चल रहे हैं ज़माने में
रिश्वतों के
सिलसिले .....,
क्यों न, तुम भी
कुछ ले-दे कर
मुझ से मोहब्बत कर लो...!
~ 'नवी'
Sept 5, 2013 | e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
रिश्वतों के
सिलसिले .....,
क्यों न, तुम भी
कुछ ले-दे कर
मुझ से मोहब्बत कर लो...!
~ 'नवी'
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