
न शाम है न सवेरा, अजब दयार में हू
मै एक अरसए बेरंग के हिसार में हू
*दयार=जगह; अरसए बेरंग=अजीब स्थिति; हिसार=घेरा
सिपाहे गैर ने कब मुझको जख्म-जख्म किया
मै आप अपनी ही साँसों के कारज़ार में हू
*सिपाहे गैर=शत्रु सेना; कारज़ार=युद्धस्थल
कशा-कशा जिसे ले जाएँगे मकतल
मुझे खबर है की मै भी उसी कतार में हू
*कशा-कशा=धीरे-धीरे; मकतल=वधगृह के समीप
अता-पता किसी खुशबु से पूछ लों मेरा
यही-कही किसी मंजर, किसी बहार में हू
न जाने कौन से मौसम में फूल महकेंगे
न जाने कब से तेरी चश्मे-इन्तजार में हू
*चश्मे-इन्तजार=इंतजार कर रही आँख
शरफ मिला है कहा तेरी हमरही का मुझे
तू शहसवार है और में तेरे गुबार में हू
*शरफ=सौभाग्य; हमरही=सहयात्रा; शहसवार=घुड़सवार; गुबार=धूल
~ अतहर नफ़ीस,
Sept 11, 2013
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