Disable Copy Text

Sunday, November 23, 2014

सारी रतिया जागकर

सारी रतिया जागकर मिलत खिलत बतियात
पलक पलक झपकत रही, नैन रहे लजियात
नैन रहे लजियात, बेध कर उर मा बासै
मैन मोय अकुलात,सोच कर उठि उठि सांसै
कह सागर सुमनाय , प्रेम सौं नहीं बिमारी
लगै जो एकौ दांय , छुटे न उमर ये सारी....

~ सागर सुमन
   Sept 11, 2013

No comments:

Post a Comment