ज़िन्दगी से उन्स है,
हुस्न से लगाव है
धड़कनों में आज भी
इश्क़ का अलाव है
दिल अभी बुझा नहीं,
रंग भर रहा हूँ मैं
ख़ाक-ए-हयात में,
आज भी हूँ मुनहमिक
फ़िक्र-ए-कायनात में
ग़म अभी लुटा नहीं
हर्फ़-ए-हक़ अज़ीज़ है,
ज़ुल्म नागवार है
अहद-ए-नौ से आज भी
अहद उसतवार है
मैं अभी मरा नहीं
*मुनमहिक=संलग्न
*उसतवार=पुष्ट
~ साहिर लुधियानवी
August 5, 2013
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