
तुम्हारे आभार की लिपि में प्रकाशित
हर डगर के प्रश्न हैं मेरे लिए पठनीय
कौन-सा पथ कठिन है.....?
मुझको बताओ
मैं चलूँगा ।
कौन सा सुनसान तुमको कोंचता है
कहो, बढ़कर उसे पी लूँ
या अधर पर शंख-सा रख फूँक दूँ
तुम्हारे विश्वास का जय-घोष
मेरे साहसिक स्वर में मुखर है ।
तुम्हारा चुंबन
अभी भी जल रहा है भाल पर
दीपक सरीखा
मुझे बतलाओ
कौन-सी दिशि में अंधेरा अधिक गहरा है ।
~ दुष्यंत कुमार
Sept 12, 2013
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