नज़र उस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे
कभी जो फूल बन जाये, कभी रुखसार हो जाये ।
चला जाता हूं हंसता खेलता मौजे-हवादिस से
अगर आसानियां हों, जिन्दगी दुश्वार हो जाये।
*रुखसार=गाल; मौजे-हवादिस=दुर्घटनाओं का शहर
~ 'असग़र' गोंडवी
Sept 11, 2013 | e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
कभी जो फूल बन जाये, कभी रुखसार हो जाये ।
चला जाता हूं हंसता खेलता मौजे-हवादिस से
अगर आसानियां हों, जिन्दगी दुश्वार हो जाये।
*रुखसार=गाल; मौजे-हवादिस=दुर्घटनाओं का शहर
~ 'असग़र' गोंडवी
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