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Sunday, November 23, 2014

नज़र उस हुस्न पर ठहरे तो

नज़र उस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे
कभी जो फूल बन जाये, कभी रुखसार हो जाये ।
चला  जाता  हूं   हंसता   खेलता   मौजे-हवादिस   से                      
अगर   आसानियां  हों,  जिन्दगी   दुश्वार   हो   जाये।

*रुखसार=गाल; मौजे-हवादिस=दुर्घटनाओं का शहर

~ 'असग़र' गोंडवी

   Sept 11, 2013 | e-kavya.blogspot.com
   Submitted by: Ashok Singh

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