एक हल्का सा तबस्सुम एक गहरा-सा ख़ुमार
हाए वो आँखें कि तारे देखते हों कोई ख़्वाब ।
*तबस्सुम=मुस्कराहट
~ जाँनिसार अख़्तर
Sept 12, 2013 | e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
हाए वो आँखें कि तारे देखते हों कोई ख़्वाब ।
*तबस्सुम=मुस्कराहट
~ जाँनिसार अख़्तर
Sept 12, 2013 | e-kavya.blogspot.com
Submitted by: Ashok Singh
No comments:
Post a Comment